Wednesday, May 12, 2010

यार विकी , अपना नाम रख ले लकी । कहने के लिए तो होगा । वरना तुझे पता है एक्टर होना कितनी बड़ी खता है । बाबू जी ने मोबाइल पर पूछा ,क्या कर रहे हो मैंने कहा वेटिंग फॉर गोदो । कहने लगे दलते रहो कोदो। नहीं कुछ कर रहे तो वापस आ जाओ गांव में जमीन है उसे ही जोतो । कब तक पड़े पड़े सड़ते रहोगे। छोटे से रोल के लिए घुट घुट के मरते रहोगे। आंख के अंधे हो नाम है नयन तारा। यहां तो बुर्जुआ थे ,वहां बन गए सर्वहारा ।

2 comments:

  1. शुभकामनाएँ कि सफल हों!!



    एक विनम्र अपील:

    कृपया किसी के प्रति कोई गलत धारणा न बनायें.

    शायद लेखक की कुछ मजबूरियाँ होंगी, उन्हें क्षमा करते हुए अपने आसपास इस वजह से उठ रहे विवादों को नजर अंदाज कर निस्वार्थ हिन्दी की सेवा करते रहें, यही समय की मांग है.

    हिन्दी के प्रचार एवं प्रसार में आपका योगदान अनुकरणीय है, साधुवाद एवं अनेक शुभकामनाएँ.

    -समीर लाल ’समीर’

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  2. गांव में जमीन है उसे ही जोतो ।
    उत्तम!

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