यार विकी , अपना नाम रख ले लकी । कहने के लिए तो होगा । वरना तुझे पता है एक्टर होना कितनी बड़ी खता है । बाबू जी ने मोबाइल पर पूछा ,क्या कर रहे हो मैंने कहा वेटिंग फॉर गोदो । गुस्सा होकर कहने लगे दलते रहो कोदो। नहीं कुछ कर रहे तो वापस आ जाओ गांव में जमीन है उसे ही जोतो । कब तक पड़े पड़े सड़ते रहोगे।छोटे से रोल के लिए मरते रहोगे। आंख के अंधे हो नाम है नयन तारा। यहां तो बुर्जुआ थे ,वहां बन गए सर्वहारा ।
हमें तो अपनों ने लूटा, गैरों में कहाँ दम था. मेरी हड्डी वहाँ टूटी, जहाँ हॉस्पिटल बन्द था. मुझे जिस एम्बुलेन्स में डाला, उसका पेट्रोल ख़त्म था. मुझे रिक्शे में इसलिए बैठाया, क्योंकि उसका किराया कम था. मुझे डॉक्टरोंने उठाया, नर्सों में कहाँ दम था. मुझे जिस बेड पर लेटाया, उसके नीचे बम था. मुझे तो बम से उड़ाया, गोली में कहाँ दम था. मुझे सड़क में दफनाया क्योंकि कब्रिस्तान में जश्न था। हिजडे़ वो नहीं जो साडी़ पहनकर ताली बजाते घूमते रहते है , हिजडे़ वो है जो सरकार के पक्षपाती गलत निर्णय का विरोध करने के बजाय ताली बजाते है । नैनो मे बसे है ज़रा याद रखना, अगर काम पड़े तो याद करना, मुझे तो आदत है आपको याद करने की, अगर हिचकी आए तो माफ़ करना....... दुनिया वाले भी बड़े अजीब होते है कभी दूर तो कभी क़रीब होते है। दर्द ना बताओ तो हमे कायर कहते है और दर्द बताओ तो हमे शायर कहते है...... लड़की की हल्की सी मुस्कुराहट को प्यार का एहसास समझ लेते है ये वही लोग है साहेब, जो शौचालय को विकास समझ लेते है। ...
शुभकामनाएँ कि सफल हों!!
ReplyDeleteएक विनम्र अपील:
कृपया किसी के प्रति कोई गलत धारणा न बनायें.
शायद लेखक की कुछ मजबूरियाँ होंगी, उन्हें क्षमा करते हुए अपने आसपास इस वजह से उठ रहे विवादों को नजर अंदाज कर निस्वार्थ हिन्दी की सेवा करते रहें, यही समय की मांग है.
हिन्दी के प्रचार एवं प्रसार में आपका योगदान अनुकरणीय है, साधुवाद एवं अनेक शुभकामनाएँ.
-समीर लाल ’समीर’
गांव में जमीन है उसे ही जोतो ।
ReplyDeleteउत्तम!